अप्रतिवेद्य
भार के सवच्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्रातिकार
सिसविवल अपील संख्या 3668/2022
(विवशेष अनुमति याति*का (सी) संख्या 15501/2021 से उत्पन्न)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ................... प्रत्यर्थी5 (गण)
विनण;य
न्यायमूर्ति इंविदरा बनर्जी5
अनुमति प्रदान की गई।
यह अपील अंतिम विनण;य और आदेश विदनांक 18.08.2021 के विवरूद्ध है, सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 द्वारा दायर रिरट याति*का डब्ल्यू सी संख्या 27656/2018 है, सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के उति* मूल्य की दुकान के लाइसेंस को रद्द करने के आदेश को *ुनौी दी गई है।
हमारे समक्ष अपीलार्थी5 उति* मूल्य की दुकान के लिलए लाइसेंस का अनुव5 आवंटी है। अपीलार्थी5 उति* मूल्य की दुकान *लाा है। अपीलार्थी5 ने
कणिर्थी रिरट याति*का में प्रत्यर्थी5 के रूप में शाविमल विकए र्जीाने के लिलए आवेदन विकया र्थीा। उक्त आवेदन पर विव*ार नहीं विकया गया।
प्रत्यर्थी5 संख्या 4 की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अतिवक्ता और प्रत्यर्थी5 प्रातिकारिरयों की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अतिवक्ता को सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने पाया विक लाइसेंसिंसग प्रातिकारी ने प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के विपछले आ*रण के आार पर लाइसेंस को पूरी रह से रद्द करने के लिलए आगे बढ़े र्थीे क्योंविक उनका लाइसेंस इससे पहले 2013-2014 में रद्द कर विदयागया र्थीा।
उच्च न्यायालय का विव*ार र्थीा विक एक बार 2013-14 में विनलंबन के आदेश को विनरस् करने के बाद, लाइसेंस को उसके विपछले आ*रण के कारण रद्द नहीं विकया र्जीा सका र्थीा, लेविकन केवल नई सामग्री के आार पर सिर्जीस पर संबंति प्रातिकारी **ा; करने के लिलए बाध्य र्थीा और आरोपों को साविब करने की आवश्यका र्थीी।ऐसा प्री होा है विक संबंति लाइसेंसिंसग प्रातिकारिरयों ने प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के लिnलाफ या ो अपीलीय प्रातिकारी के समक्ष या उच्च न्यायालय के समक्ष आरोपों को साविब करने के लिलए कोई प्रयास नहीं विकया।उच्च न्यायालय ने विनष्कष; विनकाला विक प्रातिकारिरयों ने अपीलका; के विपछले आ*रण के आार पर लाइसेंस रद्द करने के र्जीाल में फंस गए र्थीे।
यह अपीलका; का मामला है विक अपीलका; को पक्षकार के रूप में शाविमल विकया र्जीाना *ाविहए र्थीा और उति* मूल्य की दुकान का लाइसेंस रद्द करने से पहले सुनवाई की र्जीानी *ाविहए र्थीी। इसमें कोई संदेह नहीं विक आक्षेविप आदेश सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के उति* मूल्य की दुकान के लाइसेंस को रद्द करने का आदेश रद्द कर विदया गया है सिर्जीससे उति* मूल्य दुकान लाइसेंस के बाद के आवंटी के रूप में अपीलका; के विह पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
हमारा ध्यान पूनम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2016) 2 SCC 779 में इस न्यायालय के विनण;य की ओर आकर्षिष विकया गया है। उक्त विनण;य पर अवलम्ब लेे हुए प्रत्यर्थी5 bमांक 4 की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अतिवक्ता ने क; विदया विक अपीलार्थी5 को सुने र्जीाने की आवश्यका नहीं है।
उसके पास मुकदमा *लाने का कोई अतिकार नहीं र्थीा।
पूनम (उपरोक्त) मामले में बाद के आवंविटयों को वास्व में सभी *रणों में सुना गया र्थीा।न्यायालय ने र्जीो अवारिर विकया वह यह र्थीा विक पश्चाव5 आवंटी अपने अतिकार को स्वंत्र रूप से स्र्थीाविप करने का प्रयास कर रही र्थीी।उन्होंने क; विदया विक उनके पास एक स्वंत्र कानूनी अतिकार है।इस न्यायालय ने पाया विक यह मानना बहु मुस्थिश्कल र्थीा विक उसके पास एक स्वंत्र कानूनी अतिकार र्थीा।
सुविमत्रा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (सिसविवल अपील संख्या 9363-9364/2014) मामले में माननीय न्यायमूर्ति रंर्जीना प्रकाश देसाई और माननीय न्यायमूर्ति एन. वी. रमण ( त्कालीन न्यायमूर्ति के रूप में) की पीठ ने विदनांक 08.10.2014 को एक आदेश पारिर विकया, सिर्जीसका प्रासंविगक सन्दभ; नी*े उद्धृ विकया गया हैः-
“अपीलार्थी5 ने बाद में आबंविट होने के कारण 17.10.2008 को रिरट याति*का
में अणिभयोग के लिलए एक आवेदन दायर विकया। उस आवेदन पर न ो विव*ार
विकया गया और न ही अनुमति दी गई।
हमारी राय में अपीलका; के विवद्वान अतिवक्ता ने क; विदया और कहा विक उच्च
न्यायालय को प्रत्यर्थी5 संख्या 6 का लाइसेंस बहाल करने से पहले अपीलार्थी5
को सुनना *ाविहए र्थीा क्योंविक अपीलार्थी5 बाद में आबंविट र्थीा और उसके
अतिकार प्रत्यर्थी5 संख्या 6 के लाइसेंस की बहाली से प्रभाविव र्थीे।हम
अपीलार्थी5 के विवद्वान अतिवक्ता से पूरी रह सहम हैं।हमारी राय में, उच्च
न्यायालय अपीलार्थी5 को सुने विबना प्रत्यर्थी5 संख्या 6 का लाइसेंस बहाल नहीं
कर सका र्थीा क्योंविक ऐसे आदेश से उसके अतिकार विनतिश्च रूप से प्रभाविव
हुए र्थीे।”
भले ही बाद के आबंविटी के पास स्वंत्र अतिकार न हो, विफर भी उसे सुनवाई का अतिकारहै और रद्दीकरण के आदेश का ब*ाव करने के लिलए विनवेदन करने का अतिकार है।
यह स* है विक अपीलार्थी5 की विनयुविक्त के आदेश में कहा गया है विक आदेश अदाल में लंविब काय;वाही के परिरणाम के अीन है।यह अपीलका; कोयह विदnाने की कोणिशश करके विक प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के लिnलाफ रद्द करने का आदेश सही ढंग से पारिर विकया गया र्थीा, काय;वाही में उपस्थिस्र्थी होने और लड़ने से अयोग्य नहीं करा है।
दनुसार, अपील को अनुमति दी र्जीाी है।आक्षेविप विनण;य और आदेश को अपास् विकया र्जीाा है।
अपीलार्थी5 को रिरट काय;वाविहयों में पक्षकार के रूप में माना र्जीाएगा। अपीलार्थी5 को सुनवाई का उति* अवसर देने के बाद रिरट काय;वाविहयों का विनस्ारण विकया र्जीाएगा।यह देnे हुए विक काय;वाही लंबे समय से लंविब है और हम उच्च न्यायालय से अनुरो करे हैं विक इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की
ारीn से ीन महीने के भीर उच्च न्यायालय में लंविब रिरट याति*का का विनस्ारण करें।
( न्यायमूर्ति इंविदरा बनर्जी5 )
( न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना )
नई विदल्ली;
06 मई, 2022